जमशेदपुर के कल्याण गुरुकुल के 21 प्रशिक्षणार्थी मैसूर में ऑटोमोटिव एक्सल लिमिटेड में प्लेसमेंट

जमशेदपुर के कल्याण गुरुकुल के 21 प्रशिक्षणार्थी मैसूर में ऑटोमोटिव एक्सल लिमिटेड में प्लेसमेंट

जमशेदपुर के कल्याण गुरुकुल के 21 प्रशिक्षणार्थियों को मैसूर स्थित ऑटोमोटिव एक्सल लिमिटेड में नौकरी का अवसर मिला — ये सिर्फ एक प्लेसमेंट नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की शुरुआत है। शुक्रवार, 27 नवंबर, 2025 को धनचट्टानी, घोराबंधा, जमशेदपुर स्थित गुरुकुल के कैंपस में आयोजित सर्टिफिकेट वितरण समारोह में सोमेश चंद्र सोरेन, जमशेदपुर के विधायक, ने इन युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे। ये छात्र कल्याण गुरुकुल की बैच नंबर 103 के हिस्से हैं, और इनमें से ज्यादातर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के युवा हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी।

एक गुरुकुल, एक सपना

इस समारोह में एमके शर्मा, कल्याण गुरुकुल के प्रिंसिपल, ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, "आपके पास अभी एक ऐसा मौका है जो आपके परिवार के लिए गर्व का कारण बन सकता है। इसे सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी के रूप में लें।" विधायक सोरेन ने अपने भाषण में कहा, "आप सबके पास एक मजबूत मंच है। इसका पूरा फायदा उठाएं, अपने माता-पिता, गुरुकुल और राज्य के नाम को रोशन करें।" इस अवसर पर लुआबासा पंचायत मुखिया सिंघोन मुर्मू, उपमुखिया शर्मिला महातो, सामाजिक कार्यकर्ता जयराम महातो, और प्रबंधन टीम के सदस्य तरुण शुक्ला भी उपस्थित रहे।

कल्याण गुरुकुल: शिक्षा का नया रूप

ये गुरुकुल जमशेदपुर और झारखंड के अन्य हिस्सों में प्राग्या फाउंडेशन द्वारा संचालित हैं, जो गरीब, पिछड़े और शिक्षा छोड़ चुके युवाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण का एक अद्वितीय मॉडल प्रस्तुत करता है। अब तक झारखंड में 28 कल्याण गुरुकुल, 8 एएनएम नर्सिंग कॉलेज और 1 आईटीआई कौशल कॉलेज सक्रिय हैं। इनके जरिए अब तक 10,000 से अधिक युवाओं को भारत और विदेशों में प्रसिद्ध कंपनियों में रोजगार मिल चुका है।

इसी तरह, मथन कल्याण गुरुकुल, बीएसके कॉलेज के पास स्थित, ने अब तक 525 छात्रों को चेन्नई, बैंगलोर और दिल्ली जैसे शहरों में नौकरियां दिलवाई हैं। इस गुरुकुल के प्रिंसिपल मुकेश कुमार ने बताया कि अगली बैच 10 फरवरी, 2025 से शुरू होगी, जिसमें वे उन युवाओं को शामिल करना चाहते हैं जिन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है।

एक बैच का इतिहास, दो रिपोर्ट

यहां एक दिलचस्प बात है — लाइव हिंदुस्तान की 10 फरवरी, 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, बैच नंबर 96 के 27 छात्रों को भी उसी कंपनी, ऑटोमोटिव एक्सल लिमिटेड में प्लेसमेंट मिला था। ये दोनों बैच अलग-अलग समय पर हुए, लेकिन एक ही कंपनी में। इससे साफ होता है कि कल्याण गुरुकुल का नियमित और निरंतर प्लेसमेंट प्रोग्राम सिर्फ एक अवसर नहीं, बल्कि एक सिस्टम है।

मैसूर में ऑटोमोटिव एक्सल लिमिटेड एक प्रमुख ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर है, जो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक्सल, शाफ्ट और ड्राइव ट्रेन कंपोनेंट्स बनाता है। यहां काम करने वाले युवाओं को न केवल आय का अवसर मिलता है, बल्कि एक डिस्टिंक्ट टेक्निकल स्किल भी।

क्यों ये बदलाव मायने रखता है?

इस तरह के प्रोग्राम भारत के शिक्षा प्रणाली के एक बड़े अंतर को भर रहे हैं — वह अंतर जो गरीब युवाओं को उनकी पढ़ाई के बाद भी नौकरी से वंचित कर देता है। ये गुरुकुल सिर्फ ट्रेनिंग नहीं देते, बल्कि एक नया समाज बनाते हैं — जहां एक अनुसूचित जनजाति का लड़का एक इंजीनियरिंग कंपनी में काम कर सकता है, और एक पिछड़ी जाति की लड़की नर्सिंग कॉलेज से ग्रेजुएट होकर अस्पताल में काम कर सकती है।

कल्याण गुरुकुल के अनुसार, इन युवाओं का 78% पहले घर पर नौकरी के लिए अक्षम माने जाते थे। अब वे अपने घरों में आय के स्रोत बन गए हैं। कुछ ने अपने छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च उठाना शुरू कर दिया है। कुछ ने अपने गांव में ट्रेनिंग सेंटर खोलने की योजना बनाई है।

अगला कदम: अंतरराष्ट्रीय बैच और राष्ट्रीय मॉडल

अब कल्याण गुरुकुल जमशेदपुर अपना पहला इंटरनेशनल बैच शुरू कर रहा है, जिसमें विदेशों में रोजगार के लिए तैयारी की जाएगी। यह एक बड़ा कदम है — क्योंकि अब ये गुरुकुल सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि विश्व के लिए काम करने लगे हैं।

कर्नाटक सरकार के अनुसार, अगले साल 1 अगस्त को मूडबिद्री में एक विशाल प्लेसमेंट ड्राइव होगी, जिसमें 200 से अधिक कंपनियां शामिल होंगी। ये गुरुकुल अब इस तरह की घटनाओं का हिस्सा बन रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कल्याण गुरुकुल क्या है और ये किन लोगों के लिए है?

कल्याण गुरुकुल, प्राग्या फाउंडेशन द्वारा संचालित, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के उन युवाओं के लिए है जिन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। ये संस्थान व्यावसायिक कौशल विकास, आत्मविश्वास और नौकरी के अवसर प्रदान करते हैं। झारखंड में 28 गुरुकुल सक्रिय हैं, जिन्होंने अब तक 10,000 से अधिक युवाओं को रोजगार दिया है।

ऑटोमोटिव एक्सल लिमिटेड क्या करती है?

ऑटोमोटिव एक्सल लिमिटेड, मैसूर स्थित एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपोनेंट निर्माता है, जो कारों और ट्रकों के लिए एक्सल, शाफ्ट और ड्राइव ट्रेन पार्ट्स बनाती है। ये कंपनियां टेक्निकल ट्रेनिंग वाले युवाओं को प्राथमिकता देती हैं, क्योंकि उनके पास नियमित और व्यावहारिक कौशल होते हैं।

इस तरह के गुरुकुल अन्य राज्यों में कैसे काम कर रहे हैं?

कर्नाटक में भी ऐसे ही स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चल रहे हैं, जैसे कि विद्यागिरि मूडबिद्री में अगले साल आयोजित होने वाली बड़ी प्लेसमेंट ड्राइव। लेकिन झारखंड के कल्याण गुरुकुल अद्वितीय हैं क्योंकि ये सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्स्थापन का काम करते हैं — एक ऐसा मॉडल जो अन्य राज्यों के लिए नमूना बन सकता है।

क्या ये गुरुकुल सिर्फ लड़कों के लिए हैं?

नहीं। कल्याण गुरुकुल में 42% छात्राएं हैं, जिन्हें एएनएम नर्सिंग, टेक्निकल ट्रेनिंग और आईटीआई कोर्सेज में प्रशिक्षित किया जाता है। कुछ छात्राएं अब बैंगलोर और हैदराबाद के अस्पतालों में काम कर रही हैं। ये एक ऐसा बदलाव है जो लिंग असमानता को धीरे-धीरे तोड़ रहा है।

अगली बैच कब शुरू होगी और कैसे जुड़ें?

मथन कल्याण गुरुकुल की अगली बैच 10 फरवरी, 2025 को शुरू होगी, जबकि जमशेदपुर के गुरुकुल का इंटरनेशनल बैच अगले महीने से शुरू होगा। आवेदन के लिए आप प्राग्या फाउंडेशन की वेबसाइट या निकटतम गुरुकुल कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। आवेदन के लिए कोई प्रवेश परीक्षा नहीं है — केवल शिक्षा छोड़ने का प्रमाण और आर्थिक आवश्यकता का प्रमाण।

इस तरह के प्रोग्राम देश के लिए क्यों जरूरी हैं?

भारत में लगभग 3.2 करोड़ युवा शिक्षा छोड़ चुके हैं। इनमें से 80% के पास नौकरी के लिए कोई कौशल नहीं है। कल्याण गुरुकुल जैसे प्रोग्राम इस खाई को भर रहे हैं — न केवल रोजगार देकर, बल्कि युवाओं को उनके अपने भविष्य के निर्माता बनाकर। ये सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक बहाली है।

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अमितेश व्यास

अमितेश व्यास

मेरा नाम अमितेश व्यास है। मैं एक परिवार और पत्रिका विशेषज्ञ हूं। मैं कविता के विषय में लिखने का बहुत शौक रखता हूं। मुझे अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों के दिलों को छूना बहुत पसंद है। मेरी लेखनी मुझे मेरे पाठकों के बीच एक विशिष्ट पहचान दिला रही है।

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